Turmeric Farming से होगा किसानों को 4 गुना फायदा, हल्दी के हैं इतने सारे उपयोग

Turmeric Farming: Turmeric (हल्दी) की खास बात यह है कि इसका उत्पादन सभी प्रकार की मिट्टी में किया जा सकता हैं l लेकिन इसका जल निकास अच्छा होना चाहिए l इसका PH वैल्यू 5 से लेकर 7.5 होना चाहिए l Turmeric Farming के लिए दोमट, जलोढ़, लैटेराइट मिट्टी,जिसमें जीवांश की मात्रा अधिक होती है l वह इसके उत्पाद के लिए काफ़ी अच्छा होता है और वही अगर पानी भरी मिट्टी की बात करे तो यह इसके लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त होती है l

Turmeric (हल्दी) Turmeric की उत्पत्ति दक्षिण पूर्व एशिया में हुई हैं और हल्दी का वानस्पतिक नाम कुर्कमा लांगा हैं. इसका उपयोग प्राचीनकाल से विभिन्न रूपों में किया जाता है l Turmeric यानी हल्दी में रंग महक एवं औषधीय गुण पाये जाते हैं साथ ही इसमें जैव संरक्षण एवं जैव विनाश दोनों ही गुण पाए जाते हैं l आप को बता दें हल्दी जिंजिवरेंसी कुल का पौधा हैंl

Turmeric Farming

हल्दी में (Bioconservation and Bio-Development ) yani जैव संरक्षण एवं जैव विनाश दोनों ही गुण पाए जाते हैं l यह तंतुओं की सुरक्षा एवं जीवाणु ( bacteria) को मारता है l हल्दी का उपयोग भारत में औषधीय रूप में होता है साथ ही समाज में सभी शुभकार्यों में इसका उपयोग बहुत प्राचीनकाल से हो रहा है l

Black Turmeric Farming यानी की काली हल्दी की खेती आप अगर काली हल्दी की खेती करना तो तगड़ा मुनाफा हो सकता है। इस फसल को तैयार होने में क़रीब 7-8 महीने में हो जाता है। आप को बता दें एक हेक्टेयर में खेती में करीब 5 लाख रुपये तक का मुनाफा हो सकता है।

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काली हल्दी के औषधीय गुण (Medicinal Benefits of Black Turmeric)

Turmeric Farming

काली हल्दी (Black Turmeric) के बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं जिसके कारण इसकी कीमत बहुत अधिक होती है। बीमारियों में जैसे की निमोनिया, खांसी, बुखार, अस्थमा आदि में Black Turmeric का उपयोग होता है। इसके साथ साथ कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के लिए दवा भी इससे बनाई जाती है। Black Turmeric का इस्तेमाल भारत में जादू-टोने और तंत्र-मंत्र में भी होता है। साथ ही माइग्रेन से राहत के लिए काली हल्दी का माथे पर लेप काफी लाभ दायक होता है l Black Turmeric दवा के अलावा,सुंदरता बढ़ाने वाले बहुत से प्रोडक्ट में भी इसका इस्तेमाल होता हैं। Black Turmeric को दूध में मिलाकर चेहरे पर लेप भी लगाया जाता है, जिससे निखार आता है।

वर्टीकल खेती (Vertical Farming)

Turmeric Farming

वर्टिकल फार्मिंग (Vertical Farming) करने के लिए पहले जीआई पाइप और करीब 2-3 फुट गहरे, 2 फुट तक चौड़े लंबे-लंबे कंटेनर्स को वर्टिकल तरीके से सेट किया जाता है और इसमें ऊपर का हिस्सा खुला होता है l जिसमें Turmeric यानी कि हल्दी की खेती होती है। ज्यादा तर लोग Vertical Farming हाइड्रोपोनिक या एक्वापोनिक तरीके से करते हैं और इसमें मिट्टी का इस्तेमाल नहीं होता हैं l

इसको तैयार करने के लिए एक बड़ा शेड बनाना होता है l जिसमें यह खेती होती है। साथ ही इस बात का ध्यान रखना होता है कि तापमान 12 से 26 डिग्री के बीच में रहे । तापमान को कंट्रोल में रहे इसके लिए फॉगर्स का इस्तेमाल होता है, आप को बता दें यह तापमान बढ़ते ही पानी का फुहारा बरसाने लगते हैं l Vertical Farming का ढांचा जीआई से बना होता है l जिसके कारण यह कम से कम 24 सालों तक खराब नहीं होता। इसका मतलब यह है कि पहली बार बार बड़ा खर्चा होगा l उसके बाद कम से कम 24 साल तक आप उसका फायदा ले सकते हैं।

वर्टीकल खेती के व्यापारिक विचार (Vertical Farming Business Idea)

 

Turmeric Farming

दुनिया में बहुत तेज़ी से आबादी बढ़ती जा रही है और इस कारण ज़मीने कम होती जा रही है। इस प्रॉब्लम को देखते हुए इजराइल की तकनीक इजाद की वर्टिकल फार्मिंग l इस तकनीक से कम जगह में अधिक फसल उगाई जा सकती है। खास बात यह है कि अगर आप इसमें Turmeric यानी कि हल्दी की खेती (Turmeric Farming) करते हैं तो 1 एकड़ में ही 100 एकड़ के बराबर फसल मिल जाएगी l चौकाने वाली बात यह है कि एक एकड़ में की गई हल्दी की खेती (Turmeric Farming) से आप करीब 2.5 करोड़ रुपये की कमाई कर सकते हैं।

हल्दी की खेती के लाभ (Turmeric farming profit)

Turmeric Farming

हल्दी की खेती (Turmeric Farming) में कम खर्च में ही चार गुना तक ज्यादा फ़ायदा होता है साथ ही, इसकी डिमांड में कमी कभी नहीं आती l जैसे की आप अगर एक हेक्टेयर की खेती में आपका खर्च करीब 1 लाख रुपये तक आएगा और इससे लगभग 3-4 लाख रुपये तक का profit होगा l

काली हल्दी की महाराष्ट्र में होती खेती (Black Turmeric farming in Maharashtra)

Black Turmeric यानी कि काली हल्दी की खास बात यह है कि इसकी खेती को किसी भी सामान्य उपजाऊ वाली भूमि में किया जा सकता है l लेकिन जलभराव वाली भूमि में नहीं | काली हल्दी की खेती में भूमि का P.H. मान 5-7 के बीच में ही होना चाहिए |

इसकी खेती (Turmeric Farming) जून के महीने में की जाती है। Black Turmeric यानी कि काली हल्दी खेती भुरभुरी दोमट मिट्टी में अच्छी होती है l लेकीन इसकी खेती करते वक्त ये ध्यान में रखना चाहिए कि खेत में बारिश का पानी ना रुके। आप को यह जानना जरुरी है कि एक हेक्टेयर में काली हल्दी के करीब 2 क्विंटल बीज लग जाते हैं। ये ऐसी खेती हैं जिसे अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है l

बारिश के पानी से ही इसकी जरूरतें पूरी हो जाती हैं। Black Turmeric की खेती (Turmeric Farming) में कीटनाशक भी इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं होती क्योंकि हल्दी में कीट नहीं लगते हैं। हालांकि कली हल्दी की अच्छी पैदावार हो इस कारण खेती से पहले ही अच्छी मात्रा में गोबर की खाद डालने से हल्दी की पैदावार अच्छी होती है।

Turmeric Farming को लेकर खास बाते

Turmeric Farming

हल्दी की खेती  (Turmeric Farming) में कम खर्च में ही चार गुना तक ज्यादा फ़ायदा होता है साथ ही, इसकी डिमांड में कमी कभी नहीं आती l

Turmeric की उत्पत्ति दक्षिण पूर्व एशिया (South East Asia) में हुई है l

Turmeric (हल्दी) की खास बात यह है कि इसका उत्पादन सभी प्रकार की मिट्टी में किया जा सकता हैं l लेकिन इसका जल निकास अच्छा होना चाहिए l इसका PH वैल्यू 5 से लेकर 7.5 होना चाहिए l

बीमारियों में जैसे की निमोनिया, खांसी, बुखार, अस्थमा आदि में Black Turmeric का उपयोग होता है। इसके साथ साथ कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के लिए दवा भी इससे बनाई जाती है। Black Turmeric का इस्तेमाल भारत में जादू-टोने और तंत्र-मंत्र में भी होता है।

साथ ही माइग्रेन से राहत के लिए काली हल्दी का माथे पर लेप काफी लाभ दायक होता है l

Black Turmeric दवा के अलावा,सुंदरता बढ़ाने वाले बहुत से प्रोडक्ट में भी इसका इस्तेमाल होता हैं।

Black Turmeric की खेती में कीटनाशक भी इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं होती क्योंकि हल्दी में कीट नहीं लगते हैं।

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