जिससे प्रेम किया उसी से शादी कर मिलेगी खुशी? जानें क्या है सुखी दाम्पत्य का राज

Happy Marriage Jisse Prem Kia Usse Shadi Karna Jaroori Hai: लोग हमेशा चाहते हैं कि उनके जीवन में एक ऐसा साथी आए जो हमसे खूब प्यार करें। अगर वही आप किसी से प्यार करते हो और वही साथी आपके जीवन में आ जाए तो यह मानो सपने के सच होने जैसा होता है। ऐसे में अगर कोई आपके जीवन में आता है तो आप उसके साथ काफी कंफर्ट फील करते हैं और अपने विचारों को अच्छे से साझा कर पाते हैं। ऐसे व्यक्ति के साथ आपको समय बिताना काफी पसंद होता है और एक दूसरे को समझते आपका जीवन सुखमय हो जाता है।

जब आप ऐसे व्यक्ति के साथ समय बिताने लगते हैं। तो आपके मन में यह ख्याल जरूर आता है कि आप दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हैं। ऐसे में आप के बीच एक रिश्ते की शुरुआत होती है। जैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है। आपके माता-पिता के ऊपर आपके शादी (Jisse Prem Kia Usse Shadi Karna Jaroori Hai) का दबाव भी बनता रहता है।

जिससे आप काफी प्रभावित ही होते हैं। तब आपके मन में यह ख्याल आता है कि आप ने जिसे चाहा है क्या उसके साथ आप जीवन भर यह रिश्ता निभा पाएंगे या नहीं। ऐसे में आज हम जानते हैं कि जिससे प्यार होता है क्या उससे शादी करनी जरूरी है या नहीं।

भारत में प्रेम विवाह (Happy Marriage) का क्या है मतलब

भारत में प्रेम विवाह (Jisse Prem Kia Usse Shadi Karna Jaroori Hai) का मतलब है दो युवाओं का आपस में विवाह करना जिसमें परिवार की सहमति हो या नहीं भी हो सकती है। यह विवाह जाती, समुदाय और धर्म के बाधाओं के इतर हो सकती है। आज के समय में भी देश में प्रेम विवाह करना काफी कठिन माना जाता है। खासकर तब तो यह काफी मुश्किल होता है जब लड़का और लड़की अलग जाति, धर्म या समुदाय के होते हैं। देश में आज भी प्रेम विवाह को दांपत्य जीवन के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।

भारतीय बुजुर्ग यानी कि हमारे माता पिता आज के समय में भी प्रेम विवाह को संस्कृति और गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली प्रथा मानती है। भारत में आज भी जब बच्चे प्रेम विवाह की कामना करते हैं तो उनके माता-पिता से उन्हें अनुमति नहीं मिलती। इसका सबसे बड़ा कारण जाति या धर्म का अंतर होता है। वही अगर लड़का फाइनेंशियल सेटल ना हो तो भी कई बार ऐसे विवाह का विरोध किया जाता है।

वही ऐसी परिस्थिति में भी कई ऐसे माता-पिता है जो प्रेम विवाह का खुलकर समर्थन करते है। उनका यह मानना होता है कि बच्चे जिन्हें पसंद करते हैं, उनसे ही शादी करना उनके दांपत्य जीवन के लिए अच्छा होगा। उनका मानना है कि एक ही जाति में शादी करना खुशी की गारंटी नहीं दे सकता है। अगर एक जाति में शादी करके भी दोनों खुश नहीं है तो यह शादी सफल नहीं हो सकती है।

अरेंज मैरिज vs लव मैरिज (Jisse Prem Kia Usse Shadi Karna Jaroori Hai)

 

Jisse Prem Kia Usse Shadi Karna Jaroori Hai

बात करें शादी (Jisse Prem Kia Usse Shadi Karna Jaroori Hai) की तो चाहे वह अरेंज मैरिज हो या लव मैरिज दोनों में दंपत्ति को सामान जिम्मेदारी हो का निर्वहन करना पड़ता है। अगर आप के परिवार की सोच व्यापक है तो वह कभी आपके प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं होंगे। दोनों ही विवाह में एक दूसरे के प्रति आद,र लगाओ और देखभाल करना पड़ता है।

ऐसा ही कर दंपति अपने शादी को सफल बना सकते हैं। अगर आप एक दूसरे के प्रति इज्जत और प्रेम रखते हैं तो यही दो चीज आपके शादी को और जीवन को खुशियों से भर सकता है। अब यह पूरी जिम्मेदारी लड़के और लड़की पर आती है कि वह किस प्रकार से एक दूसरे का ख्याल रख जीवन में आने वाली परिस्थितियों से लड़ते हैं। आने वाली कठिनाइयों का एक साथ मुकाबला कर ही जीवन को सुख में बनाया जा सकता है।

अगर आपको किसी से प्रेम है और आप उससे विवाह (Jisse Prem Kia Usse Shadi Karna Jaroori Hai) करने के लिए पूरी तरीके से तैयार हैं। तो अपने माता-पिता को इसके लिए मनाएं। उन्हें अच्छी परिस्थिति में बात को समझा कर आप उन्हें राजी कर सकते हैं। कोई भी मां बाप अपने बच्चों का अहित नहीं सोचते अगर आप अच्छी नियत से उन्हें समझाएंगे तो वह आपकी बातों को जरूर समझेंगे।

वैसे कई बार देखा गया है कि लव मैरिज में भी दंपति एक दूसरे से खुश नहीं होते और कई बार एक दूसरे को छोड़ भी देते हैं तो शादी कभी भी आपको सुख में जीवन की गारंटी नहीं देता यह आप होते हैं जो उसे सुख में बनाते हैं। शादी चाहे अरेंज हो या लव आपको अपने साथी का पूरा ख्याल रखना होगा साथ ही उसे इज्जत और प्यार भी देनी होगी। यह भी आपके जीवन को सुखमय बनाएगा।

 

Leave a Comment