Hindi: हिन्दी भाषा का इतिहास, अर्थ, नाम और विश्व में इसकी स्थिति की पूरी विवेचना

Hindi: हिंदी भारतवर्ष की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। इसकी उत्पत्ति संस्कृत से हुई है जो विश्व की प्राचीनतम भाषा में से एक है। हिंदी (Hindi) की कविताएं और कवि विश्व प्रसिद्ध है। देश के महानायक श्री अमिताभ बच्चन के पिता श्री हरिवंश राय बच्चन हिंदी के महान कवियों में से एक हैं। इनके साथ ही माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, रामधारी सिंह दिनकर, अब्दुल रहीम खान, कबीर, नागार्जुन आदि जैसे कई महान कवि इसी भाषा से हुए। आज भी भारत देश के कई लोगों को हिंदी भाषा की जानकारी नहीं है। इस देश की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा के इतिहास, अर्थ तथा प्रसिद्धि का ज्ञान यहां के लोगों को नहीं है। प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन सन 1949 को संविधान सभा ने हिंदी (Hindi) को राजभाषा का दर्जा दिया था। इसी के उपलक्ष में हर वर्ष इसी दिन इस दिवस का आयोजन पूरे देश में होता है। अगर आपको हिंदी भाषा के इतिहास और अर्थ का ज्ञान नहीं है तो आज का या लेख आपके लिए आंख खोलने वाला साबित होगा।

हिन्दी भाषा का इतिहास

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हिन्दी (Hindi) भाषा का इतिहास लगभग 1000 साल पुराना है। सातवीं आठवीं शताब्दी में ही ‘पद्य’ यानी कि कहानियों को लिखने की शुरुआत हो गई थी। शुरुआत में हिन्दी में सिर्फ अ, आ, इ, उ, ऊ, ऐ, औ यही आठ स्वर थे। बाद में जाकर इसमें ऋ, ई और ओ को जोड़ा गया था। शुरुआत के समय में हिन्दी और इसके व्याकरण को अपभ्रंश (आधुनिक भाषाओं) के रूप में प्रयोग किया जाता था। लेकिन 15 वी शताब्दी के आते-आते हिन्दी (Hindi) भाषा स्वतंत्र रूप से खड़ी हो गई। 1460 के आसपास तक इसका साहित्यिक सर्जन प्रारंभ कर दिया गया था। इसी अवधि के दौरान दोहा, चौपाई, छप्पय दोहा, गाथा, कहानियां आदि की रचनाएं शुरू हुई थी। इस समय के दौरान देश के प्रमुख साहित्यकार गोरखनाथ, विद्यापति, नरपति नलाह, चंदबरदाई और कबीर हुए। इन्होंने हिन्दी भाषा में अपनी प्रमुख रचनाएं लिखी और इससे विश्वव्यापी बना दिया।

हिन्दी भाषा का अर्थ

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असल में हिन्दी (Hindi) भाषा के कई अर्थ होते हैं। यह भारतीय भाषा का एक मानव कृत रूप है, जिसमें संस्कृत के समान, तद्भव शब्दों का अधिक और फारसी और अरबी शब्दों का कम प्रयोग किया जाता है। हिन्दी भारत की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। वहीं इसे संवैधानिक रूप से देश की आधिकारिक भाषा का दर्जा भी दिया गया है। कई लोगों का मानना है कि हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा है पर ऐसा नहीं है। देश में किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं नहीं दिया गया है। ऐसा करने के पीछे देश की अखंडता को बनाए रखना बताया गया था। भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं। आज हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि हिंदी दुनिया की 10 सबसे शक्तिशाली भाषाओं में गिनी जाती है। जब उत्तरी भारत में इस्लामिक शासन का आगमन हुआ तब पुरानी हिन्दी में कुछ फारसी और अरबी शब्दों को जोड़ा गया जिससे हिंदुस्तानी भाषा का विकास हुआ। 18 वीं शताब्दी में जब हिंदुस्तानी भाषा अपने चरम पर थी, तब उसका गहन फर्सीकरण हुआ और इस फारसीकरण से एक नई भाषा की उत्पत्ति हुई जिसे हम उर्दू कहते हैं। जब भारत देश पर अंग्रेजों का शासन हुआ तब उस औपनिवेशिक भारत में हिंदुस्तानी के बढ़ते महत्व और मुसलमानों का उर्दू से जुड़ाव देखते हुए हिंदुओं ने हिंदुस्तानी भाषा का संस्कृतिकरण करने का सोचा। इसी संस्कृतिकरण से आज की हिंदी (Hindi) भाषा की उत्पत्ति हुई। संविधान के भाग 18 में भारत के आधिकारिक भाषा का उल्लेख है। जिसके अनुच्छेद 343 में राजभाषा को निर्धारित किया गया है, इसी अनुच्छेद के अनुसार हिन्दी और अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल किया गया है।

हिन्दी भाषा को हिंदी नाम किसने दिया

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हिन्दी शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द सिंधु से हुआ है। सिंधु भारत भूमि की एक नदी को कहते हैं और प्राचीन काल में जब ईरानी इसी सिंधु नदी के किनारे बसे भूभाग पर आए तो उन्होंने इसे हिंदू, हिन्दी और फिर हिंद कहना शुरू कर दिया। बाद में रानियों ने धीरे-धीरे भारत के विभिन्न भागों में जाकर इस नाम को प्रचारित कर इस नाम का विस्तार किया। उसके बाद हिंदी का विस्तार होता गया और पूरे भारत में इस शब्द को जाना जाने लगा। इसी दौरान ईरानी ने इस भूभाग को हिंदिक कहना भी शुरू किया जिसका अर्थ होता है ‘हिन्दी का’ होता है। इसके बाद यूनानीयों ने इसे इंडीका, लैट्रिन में इंडेया और अंग्रेजी में इंडिया नाम दिया जाए गया जो हिन्दिक शब्द से ही निकला था। हिंदी (Hindi) भाषा के लिए इस शब्द का प्राचीनतम प्रयोग सफल शरगुद्दीन येज्डी द्वारा रचित जफरनामा में मिलता है, जिसे 1424 में लिखा गया था। पुराने समय में चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ ने अपभ्रंश के पुराने स्वरूप को पुरानी हिंदी का नाम दिया था।

विश्व में हिंदी (Hindi) भाषा की स्थिति

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संविधान के अनुच्छेद 343 में के तहत देवनागरी लिपि के साथ हिंदी भाषा को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया गया है। 14 सितंबर 1949 को संवैधानिक रूप से हिंदी को राजभाषा बनाया गया है। बता दें कि भारत की कोई भी राष्ट्रभाषा नहीं है हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है। विश्व भर में कुल 70 करोड़ से ज्यादा लोग हिंदी (Hindi) बोलते हैं। इस जनसंख्या में भारत के साथ मॉरीशस और फिजी जैसे देश के लोग भी शामिल है। अगर बात करें विश्व में हिंदी की स्थिति की तो यह विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। इसमें चाइना में बोली जाने वाली मंडली पहले और विश्वव्यापी इंग्लिश दूसरे स्थान पर है। वहीं चौथे और पांचवे स्थान पर क्रमशाह स्पेनिश और अरबी है। कुछ दशकों से देखा गया है कि हिंदी (Hindi) समझने और बोलने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। इसी को देखते हुए अब इंटरनेट की दुनिया में भी हिंदी को पहचान मिलने लगी है। अब ईमेल, एसएमएस या फिर कई ऐप्स हिंदी को भाषा के रूप में शामिल कर रहे हैं।

विश्व के विभिन्न देश जैसे कि फिजी, मॉरीशस, गुयाना, सूरीनाम त्रिनिदाद एवं टोबैगो और संयुक्त अरब अमीरात ने हिंदी को अल्पसंख्यक भाषा का दर्जा दे रखा है। वहीं भारत समेत विश्व भर के करीब 115 शिक्षण संस्थानों में हिंदी (Hindi) को पढ़ाया और पढ़ा जाता है।
• विश्व के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के 32 विश्वविद्यालयों में हिंदी (Hindi) को पढ़ाया जाता है।
• ब्रिटेन की लंदन यूनिवर्सिटी के साथ कैंब्रिज और यॉर्क यूनिवर्सिटी में भी हिंदी पढ़ाई जाती है यह विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में गिने जाते है।
• जर्मनी में कई संगठन हिंदी का प्रचार करते हैं साथ ही यहां के 15 शिक्षण संस्थानों में हिंदी (Hindi) का पठन-पाठन होता है।
• हमारे पड़ोसी चीन देश में भी 1942 से हिंदी का अध्ययन शुरू हो गया था और 1957 से हिंदी रचनाओं को चीनी में अनुवाद भी किया जाने लगा है।

 

 

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